बिहार कृषि यंत्र अनुदान योजना Bihar Agricultur Yojana Online Apply Form

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बिहार कृषि यंत्र अनुदान योजना

bihar राज्य में किसानो के लिए कई योजना चलाई जा रही जिसमे कृषि यंत्र बीज योजनाए शामिल है यहां हम इन सभी योजना के साथ बिहार कृषि उपकरण अनुदान योजना के बारे में भी सम्पूर्ण जानकारी जानेगे बिहार कृषि यंत्र के लिए क्या क्या डॉक्यूमेंट चाहिए इसके अलावा आवेदन कैसे करना होता है आदि आपको बता दे देश में किसानो के लिए अनुदान योजना सभी राज्यों में लागु है जिससे किसान किसी भी प्रकार का कृषि यंत्र खरीदता है तो उस कृषि यंत्र पर सरकार की और से सब्सिडी प्राप्त कर सकता है

कृषि करने में काम आने वाले यंत्र 69 विभिन्न प्रकार के कृषि यंत्रों पर अनुदान की व्यवस्था है, वत्र्तमान वित्तीय वर्ष में विभिन्न यंत्रों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ट्रैक्टर, कम्बाईन हार्वेस्टर, पावर टीलर, पम्पसेट, जीरोटिलेज/सीड कम फर्टिलाईजर ड्रिल एवं एच॰डी॰पी॰ई॰ लेमिनेटेड वुभेन ले फ्लैट ट्यूब तथा रोटावेटर का राज्य स्तर से लक्ष्य निर्धारित किया गया है,

बिहार कृषि यंत्र योजना किसानो के लिए योजना लिस्ट – बिहार कृषि यंत्र अनुदान योजना

bihar राज्य में कृषि यंत्र सहित किसानो के लिए कई योजना चलाई गई है जिसकी जानकारी यहां देख सकते है

योजना का नाम – अनुदानित दर पर बीज वितरण Bihar

इस योजनान्तर्गत भारत सरकार के नये दिशा-निर्देश के आलोक में नवीनतम प्रभेद के बीज की पहुँच ग्रामीण क्षेत्रों में करने हेतु धान एवं गेहूँ के 10 वर्षों से कम अवधि के प्रभेद के बीज पर अनुदान अनुमान्य किया गया है, जबकि दलहन एव तेलहन फसलों हेतु 15 वर्षों से कम अवधि के प्रभेद के बीज पर अनुदान अनुमान्य किया गया है।

राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्रों में बीज उत्पादन Bihar -बिहार कृषि यंत्र अनुदान योजना

राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र पर खरीफ में धान, बाजरा, मड़ुआ, अरहर, जूट, मूँग, लोबिया, मूँगफली तथा सोयाबीन, रबी में गेहूँ, जई, चना, मसूर, मटर, राई/सरसों और तीसी एवं गरमा मौसम में मूँग, उरद और तिल के बीज उत्पादन हेतु राशि कर्णांकित की गई है। प्रक्षेत्रों के स्थानीय उपयुक्तता एवं परिस्थिति के अनुसार फसलवार आच्छादन लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री तीव्र बीज विस्तार कार्यक्रम Bihar -बिहार कृषि यंत्र अनुदान योजना

योजना का उद्देश्य राज्य के सभी राजस्व गाँवो में एक साथ उन्नत प्रभेदों के बीज उपलब्ध कराकर बीज उत्पादन हेतु किसानों को प्रोत्साहित करना है। आधार बीज का वितरण सभी जिला एवं प्रखंड मुख्यालयों में शिविर आयोजित कर किया जाता है। बीज वितरण के समय ही सभी चयनित किसानों को प्रखंड स्तर पर बीजोत्पादन का प्रशिक्षण दिया जाता है।

बीज ग्राम योजना Bihar -बिहार कृषि यंत्र अनुदान योजना

इस योजना का कार्यान्वयन वर्ष 2007-08 से किया जा रहा है। योजनान्तर्गत किसानों को धान एवं गेहूँ फसल हेतु 50% अनुदान पर आधार/प्रमाणित बीज तथा दलहन एवं तेलहन फसल हेतु 60% अनुदान पर आधार/प्रमाणित बीज उपलब्ध कराया जाता है। किसानों को बीज उत्पादन हेतु तीन स्तरों पर (बोआई से पूर्व, फसल के मध्य अवस्था में एवं कटाई से पूर्व) प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रत्येक बीज ग्राम हेतु अधिकतम 100 किसानों का चयन किया जाता है। चयनित किसानों को एक एकड़ क्षेत्र के लिए चिन्हित फसलों के बीज उपलब्ध कराया जाता है।

एकीकृत बीज ग्राम योजना Bihar

एकीकृत बीज ग्राम की स्थापना हेतु गया, नालन्दा, बक्सर, रोहतास, कैमूर, भोजपुर, औरंगाबाद, कटिहार एवं पूर्णिया जिले के चिन्हित गाँव में किया जाना है, जिसमें किसानों को 60% अनुदान पर दलहन एवं तेलहन फसलों के आधार/प्रमाणित बीज तथा अन्य फसलों के बीज 50% अनुदान पर उपलब्ध कराया जाता है। स्थापित एकीकृत बीज ग्राम को पाँच वर्षो तक सहायता प्रदान की जाती है।

धान की मिनीकीट योजना Bihar

केन्द्र प्रायोजित योजनान्तर्गत मिनीकीट बीज चयनित कृषकों के बीच 80% अनुदान पर उपलब्ध कराया जाता है। इसके अन्तर्गत 5 से 10 वर्षों के विकसित प्रभेदों को राज्य के चयनित क्षेत्रों में वितरित कर उसके फलाफल को देखा जाता है कि यह प्रभेद किस क्षेत्र के लिए उपयुक्त है। इसमें आधे एकड़ के लिए बाढ़ एवं सुखाड़ रोधी धान के प्रभेद क्रमशः स्वर्णा सब-1 तथा सहभागी/सम्पदा प्रभेद के 6 किलो प्रमाणित बीज पैकेट कृषकों को उपलब्ध कराया जाता है।

बिहार राज्य बीज निगम का सुदृढ़ीकरण yojana Bihar

राज्य के विभिन्न स्थानों में भंडारण क्षमता बढ़ाने हेतु बिहार राज्य बीज निगम अंतर्गत बीज गोदाम के निर्माण तथा कुदरा एवं शेरघाटी में अतिरिक्त प्रसंस्करण की स्थापना के लिए भवन निर्माण राज्य योजना से किया जा रहा है।

बिहार स्टेट सीड एण्ड आर्गेनिक सर्टिफिकेशन एजेंसी को सहायक अनुदान Bihar

एजेंसी मे कार्यरत मानव बल, बीज जाँच प्रयोगशाला, डी॰एन॰ए॰ फिंगरप्रिंटग लैब, ग्रोआउट टेस्ट फार्म, क्षेत्रीय कार्यालयों का सुदृढ़ीकरण के साथ प्रशिक्षण एवं सॉफ्टवेयर का विकास किया गया है। सारे प्रयास राज्य में बीज की आवश्यकता के अनुरूप बीज प्रमाणन की क्षमता बढ़ाए जाने की दिशा में अग्रसर है। इस राशि का उपयोग कर राज्य में 35,000 (पैंतीस हजार) हे॰ में बीज उत्पादन का निबंधन एवं 5,15,000 (पाँच लाख पंद्रह हजार) क्विंटल प्रमाणित बीज का उत्पादन किया जाना है।

जैविक खेती प्रोत्साहन योजना Bihar

वर्ष 2017-18 में जैविक खेती को बढ़ावा देने हेतु जैविक कोरिडौर का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें प्रथम चरण में पटना से भागलपुर तक के गंगा के किनारे पड़ने वाले गाँव तथा दनियावाँ से बिहारशरीफ तक के राष्ट्रीय/राजकीय मार्ग के किनारे बसे गाँवों में जैविक कोरिडौर का निर्माण किया जायेगा।

पटना एवं नालंदा जिला में जैविक कोरिडोर का निर्माण परम्परागत कृषि विकास योजना से किया जायेगा।

पटना, नालंदा, लखीसराय, बेगुसराय, मुंगेर एवं भागलपुर जिलों के दियारा क्षेत्र में जैविक कोरिडौर का निर्माण दियारा विकास योजना से कराया जायेगा।

जैविक खेती प्रोत्साहन योजनान्तर्गत अंगीकरण एवं प्रमाणीकरण के कार्य हेतु पटना, नालंदा, वैशाली, समस्तीपुर, बेगुसराय, खगडि़या, मुंगेर, भागलपुर जिलों में गंगा के किनारे के गाँवों में कोरिडौर का निर्माण किया जायेगा।

जैविक खेती योजना से कोरिडौर में किसानों/उत्पादकों का समूह बनाकर राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम के अनुसार जैविक खेती के लिए निर्धारित पैकेज पर अनुदान देकर अंगीकरण कराकर प्रमाणीकरण कराया जायेगा।

जैविक खेती प्रोत्साहन योजनान्तर्गत जैविक खेती का अंगीकरण का कार्य जिला कृषि पदाधिकारी द्वारा किया जायेगा तथा प्रमाणीकरण संबंधी अन्य कार्य बिहार स्टेट सीड एण्ड आॅरगेनिक सर्टिफिकेशन एजेन्सी द्वारा किया जायेगा।

योजना के कार्यान्वयन के लिए सब्जी की खेती करने वाले किसान/उत्पादन समूह का चयन कर अनुदान पर जैविक उपादान का वितरण कराया जायेगा।

सभी किसानों को कलस्टर में जैविक खेती करने हेतु प्रोत्साहित किया जायेगा।

जैविक कोरिडौर में किसानों को अधिक-से-अधिक पक्का वर्मी कम्पोस्ट इकाई, गोबर गैस तथा अन्य उपादान का वितरण किया जायेगा।

जैविक खेती प्रोत्साहन योजनान्तर्गत प्रत्येक जिला में एक जैविक ग्राम की स्थापना की जायेगी जिसमें किसानों को अधिक-से-अधिक पक्का वर्मी कम्पोस्ट इकाई एवं गोबर गैस इकाई का लाभ दिया जायेगा।

वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन में वृद्धि के लिए किसानों को 75 घन फीट क्षमता के स्थायी/अर्द्धस्थायी उत्पादन इकाई पर मूल्य का 50% अधिकतम 3,000 रू॰ प्रति इकाई की दर से अनुदान देने का प्रावधान है। एक किसान अधिक-से-अधिक 05 इकाई के लिए अनुदान का लाभ ले सकते हैं। इसके अतिरिक्त व्यावसायिक स्तर पर वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उद्यमी/सरकारी प्रतिष्ठानों को सहायता का प्रावधान है। वर्मी कम्पोस्ट वितरण में मूल्य का 50% अधिकतम 300 रू॰/क्विं॰ की दर से अधिकतम 02 हेक्टेयर के लिए अनुदान का प्रावधान किया गया है। व्यवसायिक स्तर पर वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन इकाई की स्थापना हेतु निजी उद्यमी को प्रतिवर्ष 1,000, 2,000 एवं 3,000 मे॰ टन प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता के लिए लागत मूल्य का 40% अधिकतम 6.40, 12.80 एवं 20.00 लाख रूपये क्रमशः अनुदान देने का प्रावधान किया गया है, जो पॉच किस्तों में प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता का कम-से-कम 50% उत्पादन करने के उपरांत देय होगा अर्थात् कुल अनुदान राशि का प्रथम वर्ष में 30%, द्वितीय वर्ष में 20 प्रतिशत, तृतीय वर्ष में 20%, चतुर्थ वर्ष में 15% एवं पंचम वर्ष में 15% अनुदान राशि देने का प्रावधान किया गया है। सरकारी प्रतिष्ठानों को प्रतिवर्ष 1,000, 2,000 एवं 3,000 मे॰ टन प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता के लिए लागत मूल्य का शत्-प्रतिशत अधिकतम 16.00 32.00 एवं 50.00 लाख रूपये क्रमशः अनुदान देने का प्रावधान है।

जैव उर्वरक पोषक तत्वों को जमीन में स्थिर करने तथा इसे पौधों को उपलब्ध कराने में उपयोगी है। इस कार्यक्रम अन्तर्गत जो किसान जैव उर्वरक खरीदना चाहते हैं, उनके लिए मूल्य का 50% अधिकतम 75 रूपये प्रति हेक्टेयर अनुदान दर प्रस्तावित की गई है। व्यावसायिक जैव उर्वरक में सरकारी/गैर सरकारी संस्थाओं को अनुदान देने का प्रावधान किया गया है।

हरी खाद के रूप में ढैंचा तथा मूँग की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। गरमा/पूर्व खरीफ 2016 के लिए इस कार्यक्रम में ढैंचा बीज 90% तथा मूंग का बीज 80% अनुदान पर उपलब्ध कराने का कार्यक्रम स्वीकृत किया गया है।

गोबर/बायो गैस के प्रोत्साहन के लिए किसानों को 02 घनमीटर क्षमता के लिए इसके लागत मूल्य का 50% अधिकतम 19,000 रू॰ प्रति इकाई की दर से अनुदान देने का प्रावधान है।

सूक्ष्म पोषक तत्व समेकित पोषक तत्व प्रबंधन के लिए कमी वाले क्षेत्रों में सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे जिंक, बोरॉन आदि के व्यवहार से फसल उत्पादन बढ़ेगा। इस उद्देश्य से जिन क्षेत्रों में सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे जिंक, बोरॉन आदि की कमी हो रही है वहाँ किसानों को इनके व्यवहार के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए मूल्य का 50% अधिकतम 500 रू॰ प्रति हेक्टेयर अनुदानित दर पर उपलब्ध कराया जायेगा।

समेकित कीट प्रबंधन की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बीज का उपचार आवश्यक है। बीज के उपचार की तकनीक को अपनाने के लिए किसानों को बीजोपचार रसायन पर मूल्य का 50% अधिकतम 150 रूपये प्रति हेक्टेयर सहायता दी जाएगी। फसलों के लिए कुछ अत्यंत नुकसानदेह कीड़े जैसे चना का पिल्लू (पॉड बोरर), बैगन का पिल्लू (सूट एण्ड फ्रूट बोरर) आदि के नर कीट को फिरोमोनट्रेप लगाकर फँसाया जा सकता है तथा इसकी आबादी को बढ़ने से रोका जा सकता है। यह नयी तकनीक है। इसके प्रति रूझान बढ़ाने के लिए मूल्य का 90% अधिकतम 900 रूपये प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। रासायनिक कीटनाशी/फफुंदनाशी के व्यवहार से पर्यावरण प्रदूषण को समाप्त करने के लिए जैविक विकल्प अपनाना आवश्यक हैं। इनके प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए किसानों को मूल्य का 50% अधिकतम 500 रूपये प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान राशि की सहायता दी जाएगी।

कृषि यांत्रिकरण Yojana Bihar

69 विभिन्न प्रकार के कृषि यंत्रों पर अनुदान की व्यवस्था है, वत्र्तमान वित्तीय वर्ष में विभिन्न यंत्रों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ट्रैक्टर, कम्बाईन हार्वेस्टर, पावर टीलर, पम्पसेट, जीरोटिलेज/सीड कम फर्टिलाईजर ड्रिल एवं एच॰डी॰पी॰ई॰ लेमिनेटेड वुभेन ले फ्लैट ट्यूब तथा रोटावेटर का राज्य स्तर से लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि शेष यंत्रों को मांग आधारित किया गया है। कृषि यांत्रिकरण योजना में आवेदन प्राप्ति से लेकर यंत्र वितरण तक की ऑन-लाइन व्यवस्था हेतु मैकेनाइजेशन साॅफ्टवेयर का उपयोग किया जा रहा है। किसान मेला के अतिरिक्त मेला के बाहर क्रय किये गये कृषि यंत्रों पर भी अनुदान देने का प्रावधान है।

ई-किसान भवन का निर्माण Yojana Bihar

कृषि के समग्र विकास एवं कृषकों के हित में कृषि विभाग द्वारा राज्य के सभी 534 प्रखंडों में ई-किसान भवन का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य प्रखंड स्तर पर कृषि सम्बंधी उपादानों तथा अन्य सभी तकनीकी सेवाओं को एकल खिड़की से प्रदान करना है। कुल 534 प्रखंडों में से 362 प्रखंडों में ई-किसान भवन का कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष 172 प्रखंडों में निर्माण का कार्य प्रगति में है।

टाल विकास योजना Bihar

टाल क्षेत्रों में कीट-व्याधियों के समेकित प्रबंधन एवं पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए फसल का उत्पादन बढ़ाने एवं फसल समस्या समाधान में कृषकों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु कृषक प्रक्षेत्र पाठशाला संचालित किये जा रहे हैं।

दियारा विकास योजना Bihar

दियारा क्षेत्रों के विकास हेतु राज्य के बक्सर, भोजपुर, पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण, खगडि़या, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णियाँ, कटिहार, भागलपुर, मुंगेर, लखीसराय, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, बेगूसराय, सारण, सिवान, गोपालगंज, शिवहर एवं सीतामढ़ी कुल- 25 जिलों में दियारा विकास योजना कार्यान्वित की जाती है। इस योजना अंतर्गत गोर्डस यथा (कद्दु, नेनुआ, करेला), मेलन तथा भिंडी के हाईब्रिड बीज का वितरण 50% अधिकतम 8,000 (आठ हजार) रू० प्रति हे०, मटर उन्नत/हाईब्रिड बीज वितरण 50% अधिकतम (तीन हजार) रू० प्रति हे० तथा किसानों को पी०भी०सी० पाईप बोरिंग हेतु लागत मूल्य का 50% (100 फीट तक, 4 इंच व्यास की पाईप हेतु) अधिकतम मो॰-7,500 (सात हजार पाँच सौ) रूपये अनुदान अनुमान्य है।

किसान सलाहकार योजना Bihar

प्रत्येक पंचायत में पदस्थापित किसान सलाहकारों के मानदेय राज्य योजना से कर्णांकित की गई है।

धान की कम्यूनिटी नर्सरी विकास Bihar

राज्य योजना अंतर्गत धान के सामुदायिक नर्सरी एवं बिचड़ा विकास हेतु किसानों के लिए अनुदान की व्यवस्था की गई है। एक एकड़ में नर्सरी उगाने वाले किसानों को 6,500 रू॰ की सहायता प्रदान की जाती है तथा बिचड़ा वितरण मद में किसानों द्वारा बिचड़ा क्रय करने के विरूद्ध एक एकड़ रोपनी हेतु एक हजार रू॰ अनुदान अनुमान्य है।

धातु कोठिला का अनुदानित दर वितरण कार्यक्रम Bihar

राज्य योजना अंतर्गत अन्न भंडारण के लिए किसानों को अनुदानित दर पर धातु कोठिला वितरित किया जाता है।

डीजल अनुदान वितरण Bihar

वर्ष 2017-18 में अल्पवृष्टि के कारण सुखाड़ जैसी स्थिति को देखते हुए धान बिचड़ा, धान रोपनी करने तथा धान, मक्का एवं अन्य खरीफ फसलों को डीजल चालित पम्पसेट से पटवन करने के लिए सरकार द्वारा किसानों को डीजल अनुदान देने की व्यवस्था की गई है।

खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए 30 रूपये प्रति लीटर की दर से 300 रूपये प्रति एकड़ प्रति सिंचाई डीजल अनुदान दिया जायेगा। यह अनुदान धान बिचड़ा के 2 सिंचाई, धान के 3 सिंचाई, मक्का एवं अन्य खरीफ फसल के 3 सिंचाई के लिए प्रति एकड़ अधिकत्तम 900 रू० दिया जायेगा।

रबी फसलों यथा-गेहूँ फसल के तीन सिंचाई एवं अन्य रबी फसलों के लिए दो सिंचाई के लिए प्रति एकड़ 300 रू॰ की दर से अधिकतम 900 रू॰ प्रति एकड़ अनुमान्य किया गया है।

जिरो टिलेज तकनीक से गेहूँ का प्रत्यक्षण Bihar

धान फसल के कटाई उपरान्त गेहूँ की बोआई जिरो टिलेज तकनीक से करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने हेतु राज्य योजना अंतर्गत इस तकनीक से गेहूँ के प्रत्यक्षण हेतु 2,960 रू॰ प्रति एकड़ अनुदान की व्यवस्था की गई है। इससे गेहूँ की बोआई के समय में 20-25 दिनों की बचत होती है। साथ ही, किसानों को जुताई का पैसा भी बच जाता है।

बिहार कृषि योजनाओ के लिए लाभ की जानकारी के लिए यह पढ़े

Bihar कृषि योजना के लिए डॉक्यूमेंट –

बिहार कृषि योजनाओ के लिए आधार कार्ड बैंक पास बुक राशन कार्ड खेत की नक़ल (जमाबंदी) इसके अलावा ख़रीदे जाने वाले यंत्र या बीज की रसीद

बिहार कृषि यंत्र अनुदान के लिए आवेदन कैसे करे Online Apply

बिहार कृषि यंत्र सब्सिडी के लिए सबसे पहले आपको यहां दी गई आवेदन करने की गाइड लाइन पढ़ लेनी चाहिए जिससे आवेदन करने में मदद होगी सबसे पहले आपको बिहार किसान पोर्टल पर जाना है जहा आपको मेनू बार में Farmer Application में application entry पर क्लिक करना है इसके लिए सबसे पहले आपको पोर्टल को रजिस्टर करना होगा

आवेदन गाइडलाइन जरूर पढ़े

bihar राज्य कृषि यंत्र खरीदने से पहले यहां सम्पर्क कर अधिक जानकारी प्राप्त करे अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारी अथवा किसान काॅल सेन्टर के टाॅल-फ्री नं॰-18001801551 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा किसान बिहार फार्मर पोर्टल http://farmech.bih.nic.in/FMNEW/Home.aspx पर जाए

बिहार कृषि योजना फॉर्म

Ø  Form for Farmers

o   Application Form for Custom Hiring

Ø  Project based programme of Horticulture Mission

o   Application Form

o   Checklist

o   Solar Micro Cold Storage Checklist

o   Cold Storage & Reefer Van

o   Model Projects

Ø  Utility Form

o   NIC E-mail Application Form

o   IMAP – Application Form

o   Mangal Font

o   E-mail Application Form – Bihar Government

o   Asset Declaration Form – Govt. of Bihar

o   IPR Format (For IAS Officers)

o   MSDG (Push/Pull) SMS – Application Form

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