Blood: Function and Composition-रक्त के कार्य ओर उसका संगठन

Blood: Function and Composition-रक्त एक तरल सयोजी पदार्थ है जो हमारे
शरीर मे हर समय बहता रहता है यह हमारे शरीर से अपशिष्ट पदार्थो को शरीर से बाहर
निकालने व O2 ओर पोषक तत्वो को शरीर की एक एक कोशिका तक पहुचाने का कार्य
करता है रक्त मे एक तरल पदार्थ होता है जिसे प्लाज्मा कहते है प्लाज्मा मे 90% तक
पानी की मात्रा पाई जाती है ओर प्रोटीन व अकार्बनिक लवण भी पाए जाते है प्लाज्मा
के प्रोटीन मे एंटीबोडीज भी पाई जाती है !

Blood के कार्य

Blood का मुख्य कार्य फेफड़ो से ऑक्सीज़न लेजाकर शरीर के विभिन्न भागो तक पहुचाना
व शरीर मे कोशिकाओ के अपशिष्ट पर्दाथों को शरीर से बाहर निकालना होता है Blood
शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने मे भी अहम भूमिका निभाता है blood भोजन के
पोषक पर्दार्थों को छोटी आंत से लेकर शरीर के विभिन्न हिंसों तक पहुचाता है blood शरीर
को विभिन्न बीमारियो से बचाता है blood अंत:स्त्रावित ग्रंथियो द्वारा स्त्रावित हार्मोनो को उनके लक्षित अंगो तक लेकर जाता है !

Blood शरीर मे चोट लगने के बाद वहा थक्का बनाता है साथ ही घाव के स्थानो पर संकर्मण
से शरीर की रक्षा करता है blood शरीर मे क्षार व लवण के संतुलन को बनाए रखता है यह
पोषक पर्दार्थो विटामिन ,मिनरल ,ओषधि आदि को शरीर के विभिन्न भागो तक पहुचाने का कम भी करता है !

Blood का संगठन

रक्त के दो भाग होते है एक भाग तरल होता है जिसे प्लाज्मा कहते है इसमे 91-92% तक
पानी होता है दूसरा भाग कोशिकाओ का होता है जो ठोस होता है blood मे तीन प्रकार की
कोशिकाए पाई जाती है 1 लाल रक्त कोशिकाए (Erythrocytes)RBC, 2 श्वेत रक्त कोशिकाए (Leukocytes) WBC, 3 प्लेटलेट्स (बिम्बाणु)

1 लाल रक्त कोशिकाए (Erythrocytes) RBC-यह ऑक्सीज़न को फेफड़ो से लेती है ओर
शरीर के विभिन्न भागो तक पहुचाती है शरीर मे इनकी उत्पति अस्थिमज्जा (bone
marrow) or spleen मे होता है इसमे हीमोग्लोबिन पाया जाता है हीमो एक लोह वर्णक
है जबकि ग्लोबिन एक प्रकार का प्रोटीन है रक्त मे सबसे अधिक मात्रा इसी कोशिकाओ की
पाई जाती है इन का जीवन काल लग भग 100-120 दिन का होता है

2 श्वेत रक्त कोशिकाए (Leukocytes) WBC- यह कई प्रकार की होती है न्यूट्रोफिल्स -ये
बाहर से शरीर के अंदर आने वाले बैक्टीरिया को या तो उनका भक्षण कर लेते है या उनको
शरीर से बाहर निकाल देते है लिंफोसाइट्स -यह शरीर मे एंटीबोडीज के उत्पादन करने मे
अहम भूमिका निभाते है बैसोफिल्स -यह चोट लगने पर शरीर मे थक्का बनने मे सहायता करते है

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इनकी संख्या निम्न स्थितियो मे बढ़ जाती है जैसे -अधिक कार्य करने पर ,सिजेरियन
ऑपरेशन के दोरान, गर्भावस्था की स्थिति मे बाहर से जब कोई संकर्मण शरीर के अंदर इंटर
होता है तो सबसे पहले यही कोशिकाए सक्रिय होती है शरीर मे संकर्मण के दोरान इनकी
संख्या बढ़ जाती है जिस कारण शरीर का तापमान भी बढ़ जाता है !

3 प्लेटलेट्स (बिम्बाणु ) – इनको थ्रोंबोसाइट्स भी कहते है यह शरीर पर चोट लग जाने
या घाव हो जाने पर रक्त का थक्का बना कर शरीर से खून के बहने को रोकते है इस
प्रक्रिया मे चोट लगने पर बिम्बाणु टूट जाते है ओर यह एक एंजाइम स्त्रावित करते है
जो फाइब्रोनोजन से फाइब्रिन बनाने मे मदद करता है यह रेशो का निर्माण करके बहते
हुए रक्त को रोक देते है !

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