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Doodh Ganga Yojana-सरकार से 24 लाख रुपए लेकर शुरू करें डेयरी फार्मिंग बिज़नेस

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Doodh Ganga Yojana 2022

भारत पशु पालन को बढ़ावा दे रही है एसे में सरकार से कई तरह के लाभ दुधारू पशुओ का पालन करने वाले लोगो को को मिलते है सरकार द्वारा शुरू कोई तरह की योजना शुरू की गई है जिसमे Doodh Ganga Yojana भी सामिल है

पशुपालन क्षेत्र भारत में तेजी से बढ़ने वाला व्यवसाय है, जिसे लोग अपनी उच्च आय वाली नौकरी छोड़ने के बाद भी अपना रहे हैं। अगर आप हिमाचल प्रदेश के निवासी हैं तो दूध गंगा योजना का लाभ उठा सकते हैं जिसमें डेयरी फार्मिंग और संबंधित क्षेत्रों में सब्सिडी दी जाती है।

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दूध गंगा योजना

किसानों की आय बढ़ाने में डेयरी फार्मिंग की अहम भूमिका है। इसमें कोई शक नहीं कि भारत में यह बिजनेस तेजी से विकसित हो रहा है। इसमें राज्य और केंद्र सरकार की ओर से चलाई जा रही सरकारी योजनाओं का बड़ा हाथ है. ऐसी ही एक योजना है हिमाचल प्रदेश की दूध गंगा योजना, जिसके तहत हिमाचल प्रदेश के नागरिक पशुपालन क्षेत्र में अपार लाभ उठा रहे हैं। इस योजना में डेयरी फार्मिंग के अलावा इससे जुड़े क्षेत्रों में सब्सिडी भी दी जाती है जिसका लाभ किसान बिना किसी झिझक के उठा सकते हैं।

इसे भारत सरकार के पशुपालन विभाग द्वारा राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) के माध्यम से डेयरी उद्यम पूंजी योजना के रूप में लॉन्च किया गया था। इस योजना के तहत डेयरी फार्मिंग में लगे सूक्ष्म उद्यमों को संगठित डेयरी व्यवसाय उद्यमों में परिवर्तित किया जाना है।

डेयरी फार्मिंग पर सब्सिडी (Dairy Farming Subsidy)

  • 2 से 10 दुधारू पशुओं के लिए 5 लाख रुपये का ऋण दिया जाता है।
  • 5 से 20 बछड़ों के पालन-पोषण के लिए 4.80 लाख रुपये का ऋण प्रदान किया जाता है।
  • वर्मी कम्पोस्ट (दूध देने वाली गायों की इकाई से संलग्न करने के लिए) के लिए 0.20 लाख रुपये का ऋण दिया जाता है।
  • मिल्किंग मशीन/मिल्कटेस्टर/बड़े मिल्क कूलर यूनिट (2000 लीटर तक) के लिए 18 लाख रुपये का ऋण प्रदान किया जाता है।
  • दूध से स्वदेशी उत्पाद बनाने के लिए इकाइयां स्थापित करने के लिए 12 लाख रुपये का ऋण दिया जाता है।
  • दुग्ध उत्पादों के परिवहन एवं कोल्ड चेन सुविधा के लिए 24 लाख का ऋण दिया जाता है।
  • दूध और दुग्ध उत्पादों के कोल्ड स्टोरेज के लिए 30 लाख का ऋण दिया जाता है।
  • निजी पशु चिकित्सा के लिए मोबाइल एवं स्थायी इकाई पर 2.40 एवं 1.80 लाख रुपये का ऋण दिया जाता है।
  • दुग्ध उत्पाद बेचने के लिए बूथ स्थापित करने के लिए 0.56 लाख रुपये का ऋण प्रदान किया जाता है।

दूध गंगा योजना के उद्देश्य और लाभ

  • इस परियोजना का उद्देश्य डेयरी फार्मिंग में लगे सूक्ष्म उद्यमों को सफल डेयरी उद्यमों में बदलना है।
  • साथ ही, 10,000 स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से 50,000 ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना।
  • इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बड़े पैमाने पर डेयरी उत्पादों और संबंधित गतिविधियों की खुदरा बिक्री के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
  • दूध गंगा योजना के मद्देनज़र प्रदेश में प्रति वर्ष 350 लाख लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

How to take advantage of Doodh Ganga Yojana (Doodh Ganga Yojana Online Application)

यदि आप इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं और अपनी डेयरी फार्मिंग को बड़े पैमाने पर विकसित करना चाहते हैं तो आप हिमाचल प्रदेश की आधिकारिक पशुपालन वेबसाइट hpagrisnet.gov.in/hpagris/AnimalHusbandry पर जा सकते हैं। यहां आपको इस योजना के बारे में विस्तार से जानकारी मिलेगी और आप यहां से इसका लाभ भी उठा सकते हैं।

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