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किसान योजना का पैसा नहीं हो रहा खर्च

2019 के अन्तरिम बजट मे शुरू हुई किसान सम्मान निधि योजना जिसमे किसानो को सालाना 6000 रु तीन किस्तों मे दिए जाते है के लिए सरकार ने 87 हजार करोड़ रु बजट रखा था जिसमे सरकार एक साल पूरा होने के बाद भी अभी तक पूरा बजट खर्च नहीं कर प रही है वित्त वर्ष के आखिर तक तकरीबन 60,000 करोड़ रुपये तक की राशि खर्च हो सकती है. इस तरह 15,000 करोड़ रुपये यानी कुल बजट का तकरीबन 20 फीसदी राशि बिना खर्च किए बची रह सकती है. यहां बता दें कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के तहत केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2019-20 में आवंटित 87,000 करोड़ रुपये का बजट रखा है, जिसमें से अब तक 50,000 करोड़ रुपये भी खर्च नहीं हुए हैं.

जबकि देश के 14.5 करोड़ किसानो को किसान सम्मान निधि योजना का लाभ मिलना था

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किसान क्रेडिट कार्ड से SBI परेशान

सरकार द्वारा शुरू किसान क्रेडिट कार्ड लोन योजना से देश का सबसे बड़ा बैंक एसबीआई कि सेहत पर बड़ा असर पड़ रहा है आंकड़ों के अनुसार, एसबीआई का कुल एनपीए सितंबर 2016-17 से लेकर सितंबर 2019 तक 8 प्रतिशत से बढ़कर 16 प्रतिशत हो गया है। फिलहाल एसबीआई का एनपीए 17,000 करोड़ से भी ज्यादा है किसान क्रेडिट कार्ड लोन योजना के तहत एसबीआई का एनपीए (Non-Performing Assets (NPA)) बीते तीन सालों में दोगुना हो गया है।

किसान योजना कि जानकारी के लिए करे टोल फ्री नंबर पर संपर्क

किसान सम्मान योजना के लाभ के लिए किसान टोलफ्री नंबर नंबर पर कॉल कर किसान योजना कि जानकारी ले सकते है सहायक स्टेट नोडल ऑफिसर एवं आईसीडीपी के मॉनिटरिंग ऑफिसर द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजनांतर्गत आईवीआरएस आधारित टोल फ्री नंबर 1800115526 एवं 155261 जारी किए गए हैं। जिला कलक्टर संदेश नायक ने जिले के समस्त तहसीलदारों को निर्देशित किया है कि वे अपने क्षेत्र में टोल फ्री नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार करना सुनिश्चित करें, ताकि अधिकाधिक किसान योजनांतर्गत लाभान्वित हो सके।

केंद्र सरकार कि सभी सरकारी योजना

नहीं करा रहे किसान फसलों का पंजीकरण,सरकार ने दूसरी बार बढ़ाई लास्ट तारीख

किसान मेरी फसल-मेरा ब्योरा के तहत अपनी फसलों का पंजीकरण कराने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। हालात यह हैं कि सरकार के तिथि बढ़ाने और अधिकारियों के अथक प्रयास करने के बावजूद अब तक 17,735 किसानों ने ही अपनी फसलों का रजिस्ट्रेशन करवाया है। इसी के मद्देनजर सरकार ने अब दूसरी बार तिथि बढ़ाई है। अब किसान 31 जनवरी तक फसलों का रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। अधिकारियों का कहना है कि पंजीकृत किसानों को ही सरकार की योजनाओं का लाभ मिलेगा।

जिले में करीब एक लाख 21 हजार किसान परिवार कृषि से संबंध रखते हैं। किसानों द्वारा हर वर्ष सीजन अनुसार फसलों की रोपाई-बिजाई की जाती है। किसानों को योजनाओं का सीधा लाभ देने के लिए सरकार ने मेरी फसल-मेरा ब्योरा योजना लागू की है। इसके तहत हर सीजन में किसानों द्वारा पोर्टल पर अपनी फसलों का रजिस्ट्रेशन करवाना है।

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रबी सीजन के अंतर्गत सरकार ने 31 दिसंबर, 2019 तक किसानों द्वारा फसलों का रजिस्ट्रेशन करवाना आवश्यक किया था। इसके बावजूद अधिकतर किसानों ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। सरकार ने सभी किसानों को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए 15 जनवरी तक रजिस्ट्रेशन कराने की अंतिम तिथि बढ़ाई, लेकिन फिर भी किसान आगे नहीं आए।

अधिकारियों द्वारा बार-बार जागरूक करने के बावजूद अब तक जिले के 17,735 किसानों ने ही अपनी फसलों का रजिस्ट्रेशन कराया। ऐसे में अब फिर सरकार ने तिथि बढ़ाते हुए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 31 जनवरी की है। सरकार ने किसानों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए योजना को लागू किया है। इसके बावजूद किसान दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। अगर वे अपनी फसलों का रजिस्ट्रेशन नहीं कराते तो उन्हें सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। इसलिए किसानों से अपील है कि वे योजना के तहत अपना पंजीकरण कराएं, ताकि उन्हें सरकार की सुविधाओं का बेहतर लाभ मिल सके।

किसानों को सशक्त बनाएगा नाबार्ड का नया प्लान

अगले वित्तीय वर्ष के बैंकिग प्लान में किसानों को सशक्त बनाने पर खास फोकस
किया गया है। नाबार्ड द्वारा द्वारा बनाई गई अगले वित्तीय वर्ष 2020-21 की
संभाव्यता युक्त ऋण योजना तैयार कर लिया गया है। 819 करोड़ के इस प्लान में
किसानों को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। उपायुक्त रमेश घोलप ने ऋण
योजना का विमोचन किया। साथ ही बैंकों को योजना को धरातल पर उतारने को कहा गया।

नाबार्ड के डीडीएम हरिदत्त पोद्दार के अनुसार संभाव्यता युक्त ऋण योजना 2020-21
तैयार करते समय नाबार्ड द्वारा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, भारत सरकार और राज्य
सरकार की नीतियों और जिले में उपलब्ध भौतिक संसाधनों एवं संभावनाओं को ध्यान
में रखा गया है। यह संभाव्यता युक्त ऋण योजना बैंकों की साख आयोजन प्रक्रिया
और सरकार के विकास आयोजन प्रक्रिया के बीच एक कड़ी का काम करती है। कोडरमा
जिले की वर्ष 2020-21 की संभाव्यता युक्त ऋण योजना के अनुसार संभाव्यता लक्ष्य
819.82 करोड़ का है।

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पिछले वित्तीय वर्ष 2018-19 के कोडरमा जिले की जिला साख योजना के तहत
प्राथमिक क्षेत्र में 551.51 करोड़ के लक्ष्य की तुलना में उपलब्धि 475.97 करोड़ रही जो
86.30 थी। 2020-21 के प्लान में सभी इच्छुक एवं वांछित लाभुकों को फसल
उत्पादन के लिए रूपे कार्ड के साथ केसीसी ऋण देने पर जोर दिया गया है। भारत
सरकार के प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत किसानों का शत प्रतिशत कृषि
बीमा का भी लक्ष्य पीएलपी में मुख्य रूप से उद्धृत है।

भारत सरकार द्वारा घोषित सम्पूर्ण वित्तीय समावेशन योजना (प्रधानमंत्री जन-धन
योजना) के तहत प्रत्येक घर के व्यस्कों का बैंक खाता खोलने एवं अभी तक
औपचारिक बैंकिग व्यवस्था से बाहर रहे लोगों को वित्तीय समावेशन के तहत लाने पर जोर दिया गया हैं।

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लघु एवं सीमांत किसानों को स्वयं सहायता समूह एवं संयुक्त देयता समूह एवं संयुक्त किसान समूह के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराना भी पीएलपी के मुख्य उद्देश्यों में शामिल है। हाइ-टेक एग्रीकल्चर, जल संरक्षण – प्रति बूंद अधिक फसल, 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करना के साथ साथ स्किल इंडिया योजना, मुद्रा योजना, स्टैंड अप इंडिया योजना आदि पर भी विशेष बल दिया गया है। पोद्दार ने कहा कि संभावित ऋण दिया जा सकता है।

इसकी संभावना जिले में है। नाबार्ड द्वारा किसानों की बेहतरी के लिए प्लान में ऐसी कई संभावनाएं बतायी गई है। इसी आधार पर बैंकों का साख योजना तैयार होगा और लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे।

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