किसानो सहित कई सरकारी योजना Latest sarkari Yojana

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सुकन्या समृद्धि योजना
31 तक करवाना हाेगा रबी फसलों का बीमा
विदेश में पढ़ाई के लिए 40 हजार यूएस डॉलर मिलेंगे
मैन ऑफ द ईयर

1-पीएम फसल बीमा योजना: 31 तक करवाना हाेगा रबी फसलों का बीमा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसान रबी फसल 2019-20 का बीमा 31 दिसंबर तक करवा सकते हैं। इस संबंध में कलेक्ट्रेट सभागार में कार्यशाला का अायाेजन कलेक्टर जाकिर हुसैन की अध्यक्षता में किया गया। कार्यशाला में उपनिदेशक कृषि (विस्तार) दानाराम गाेदारा ने रबी 2019-20 के लिए जारी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अधिसूचना में िदए गए प्रावधान अनुसार योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए योजना में सम्मिलित स्टेक हाेल्डर्स बीमा कंपनी, बैंकर्स, कृषि एवं राजस्व िवभाग तथा किसानाें की भूमिका पर िवस्तार से जानकारी दी।

एग्रीकल्चर इंश्याेरेंस कंपनी अाॅफ इंडिया जयपुर के सहायक प्रबंधक महेंद्र सिंह नेहरा व प्रबंधक राकेश काैरी ने अधिसूचना अनुसार 2019-20 की अधूसूचित फसल, प्रीमियम राशि प्रति हैक्टेयर, जाेखिम स्तर, फसल बीमा के लिए कृषकाें की पात्रता व फसल बीमा के लिए निर्धारित समय सीमा अादि की जानकारी दी।

    2-विदेश में पढ़ाई के लिए 40 हजार यूएस डॉलर मिलेंगे

    प्रदेश सरकार ने सभी मप्र भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा पंजीकृत श्रमिकों के बेटे व बेटियों को विदेश में पढ़ाई के लिए नि:शुल्क सुविधा देने जा रही है। इसके लिए निःशुल्क शिक्षा योजना 2019 की है। विदेश में मान्यता प्राप्त संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त करने विदेश अध्ययन के लिए प्रारंभ की है।

    श्रम पदाधिकारी शिवपुरी एसके जैन ने बताया कि इस योजना के तहत वास्तविक शिक्षण शुल्क या 40,000 यूएस डॉलर तक दी जाएगी या जो कम हो। साथ ही निर्वाह भत्ता अधिकतम 10,000 यूएस डॉलर दिया जाएगा। इसके अलावा बीजा शुल्क एवं बीमा प्रीमियम, घर से एयरपोर्ट तक जाने, वापसी का द्वितीय श्रेणी का रेल, बस किराया एवं शैक्षणिक संस्थान के निकटतम स्थान तक वायुमार्ग से जाने एवं वापसी का इकोनॉमी क्लास का वास्तविक किराया नियमानुसार पात्रता वाले छात्रों को दिया जाएगा। छात्र-छात्राओं और संस्थानों का चयन राज्य स्तरीय समिति करेगी। सभी पंजीकृत श्रमिकों से अपील है कि अधिक से अधिक संख्या में मंडल की योजना का लाभ लें।

    3- सुकन्या समृद्धि योजना ऐसे मिलेंगे ₹73 लाख

    सुकन्या समृद्धि योजना स्कीम 2019: केंद्र सरकार (Central Government) ने सुकन्या समृ​द्धि योजना (SSY) को लेकर 12 दिसंबर 2019 को एक नया नोटिफिकेशन (SSY 2019 GSR 914 E) जारी किया है. इस स्कीम के तहत कोई भी व्यक्ति 10 साल से छोटी बच्ची के​ लिए SSY अकाउंट खोल सकता है. किसी एक अकाउंट होल्डर के नाम पर एक की सुकन्या समृद्धि अकाउंट (Sukanya Samriddhi Yojna) खोला जा सकता है. सुकन्या समृ​द्धि अकाउंट खोलने के लिए, बच्ची का ब​र्थ सर्टिफिकेट (Berth Certificate) और अभिभावक के जरूरी कागजात देना होता है. कोई भी व्यक्ति अधिकतम दो बेटियों के लिए यह अकाउंट खोल सकता है. हालांकि, अगर किसी परिवार में जुड़वा बेटियों का जन्म होता है तो वहां पर दो से अधिक सुकन्य समृ​द्धि अकाउंट खोले जा सकते हैं.

    सुकन्या समृद्धि अकाउंट स्कीम 2019 डिपॉजिट: एक वित्तीय वर्ष के दौरान किसी एक अकाउंट में अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक जमा किया जा सकता है. वहीं, एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम जमा राशि 250 रुपये है. इसका मतलब है कि किसी एक अकाउंट में एक वित्तीय वर्ष में आप अधिक से अधिक 1.5 लाख रुपये और कम से कम 250 रुपये तक निवेश कर सकते हैं. अगर कोई व्यक्ति गलती से इस खाते में एक 1.5 लाख रुपये से अधिक जमा कर देता है यह रकम ब्याज के ​लिए नहीं कैलकुलेट किया जाएगा. साथ ही इस रकम को डिपॉजिटर्स के खाते में रिटर्न कर दिया जाएगा. इस खाते में 15 साल तक डिपॉजिट किया जा सकता है. अगर इस अकाउंट में एक वित्तीय वर्ष के दौरान न्यूनतम रकम नहीं जमा किया जाता है तो 15 साल की अवधि के दौरान इसे कभी भी रेग्युलराइज किया जा सकता है. इसके ​लिए हर साल के हिसाब से 50 रुपये की पेनाल्टी देनी होगी.

    सुकन्या समृद्धि अकाउंट स्कीम 2019 ब्याज दर: मौजूदा समय में इस अकाउंट पर सरकार 8.40 फीसदी की दर से ब्याज दे रही है. इस पर ब्याज को हर माह 5 तारीख से लेकर माह के अंत तक जो भी न्यूनतम रकम होगी, उसी के हिसाब से कैलकुलेट किया जाएगा. हर वित्तीय वर्ष के बाद अकाउंट में ब्याज को क्रेडिट कर दिया जाएगा.सुकन्य समृ​द्धि अकाउंट को बच्ची के अभिभावक या माता/पिता 18 साल की उम्र तक संचालित कर सकते हैं. जैसे ही बच्ची की उम्र 18 साल हो जाएगी, वैसे ही बच्ची जरूरी डॉक्युमेंट्स जमा कर इस खाते का संचालन कर सकती है.

    4-सुकन्या समृद्धि अकाउंट स्कीम 2019 मैच्योरिटी:

    यह अकांउट खोलने की तारीख से लेकर ठीक 21 साल बाद मैच्योर हो जाएगा. मान लीजिए कि आप अपनी बच्ची के इस सुकन्या समृद्धि अकाउंट को 1 अप्रैल 2020 को खोल रहे हैं तो यह 31 मार्च 2041 को मैच्योर हो जाएगा. 21 साल पूरा होने के बाद इस अकाउंट को बंद किया जा सकता है. इसके लिए अकाउंटहोल्डर को एक एप्लीकेशन देना होगा. साथ ही स्टैम्प पेपर पर डिक्लेयरेशन साइन करने कर भी जमा करना होगा. इसमें उम्र प्रमाण भी देना होगा.
    इस अकाउंट को ही शादी की तारीख से एक माह पहले नहीं बंद किया जा सकता है. साथ ही अगर इस समय नहीं बंद किया जाता है तो शादी की तारीख के तीन माह के अंदर ही इस अकाउंट को बंद करना होगा.

    जानिए मैच्योरिटी पर अधिकतम कितनी रकम मिलेगी
    मौजूदा ब्याज दर के हिसाब से अगर हर वित्तीय वर्ष में 1.5 लाख रुपये 15 साल तक जमा किया जाता है तो इस पर आपके द्वारा जमा किया गया कुल रकम 45,44,820 रुपये होगा. हालांकि, यह अकाउंट 21 साल पूरे होने के बाद मैच्योर होगा.

    5- उतार-चढ़ाव के बावजूद 2019 में ‘मैन ऑफ द ईयर’ रहे नरेंद्र मोदी

    आम लोगों में कायम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस लोकप्रियता का अंदाजा इतने से ही लगाया जा सकता है. बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर मोदी सरकार चुनौतियां का सामना कर रही है. लेकिन फिर भी पीएम मोदी लोकप्रिय बने हुए हैं. सत्ता संभालने के बाद से मोदी सरकार लगातार उतार-चढ़ाव का सामना कर रही है. मोदी सरकार की कई योजनाओं ने काफी लोकप्रियता हासिल की और कई को लेकर सवाल खड़े किए गए.

    गरीब सवर्णों को आरक्षण मोदी सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल के अंतिम महीनों में अचानक एक विधेयक पेश किया, जिसमें शिक्षा क्षेत्र और सरकारी नौकरियों में उन सवर्णों, मुस्लिमों तथा ईसाइयों को 10 फीसदी रिजर्वेशन दिए जाने का प्रस्ताव था, जिन्हें आर्थिक रूप से पिछड़ा माना जा सके. इसकी परिभाषा में 8 लाख रुपये से कम वार्षिक आय अथवा पांच एकड़ से कम ज़मीन अथवा 1,000 वर्गफुट से कम आकार का मकान आदि मानक तय किए गए. माना जाता है कि इससे पीएम मोदी को लोकसभा चुनाव 2019 में काफी लाभ मिला. 

    आयुष्मान भारत योजना आयुष्मान भारत योजना या प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, जिसे आमतौर पर मोदी केयर कहा जाता है, को 1 अप्रैल, 2018 से लागू कर दिया गया. वित्त वर्ष 2018-19 के आम बजट में प्रस्तावित की मोदी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे आने वाले परिवारों को पांच लाख रुपये तक का नकदी रहित स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराया जाना है. बताया गया है 10 करोड़ गरीब परिवारों के 50 करोड़ सदस्यों को इस योजना का लाभ देने के बाद इसमें शेष भारतीयों को भी शामिल किया जाएगा.

    उज्ज्वला योजना– उज्ज्वला योजना के तहत प्रधानमंत्री मोदी ने करोड़ों संपन्न भारतीयों से रसोई गैस सिलेंडरों पर मिलने वाली सब्सिडी को स्वेच्छा से छोड़ देने की अपील की थी. केंद्र सरकार का दावा था कि इस अपील के चलते करोड़ों लोगों ने सब्सिडी छोड़ दिया और उसकी वजह से ही 5 करोड़ गरीब महिलाओं के रसोईघरों में सिलेंडर पहुंचा, या उनके परिवारों को सीधा लाभ मिला.

    दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना– अभी कुछ दिनों पहले तक देश के कोने-कोने तक बिजली नहीं पहुंच पाई थी. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने कदम उठाया, और अब उनका दावा है कि मई, 2018 तक देश के ऐसे 18,374 गांवों में बिजली पहुंचा दी गई है, जहां अब तक बिजली नहीं थी.

    अनुच्छेद 370 पर कड़ा फैसला – प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में शपथ लेने के कुछ ही महीने बाद जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने का फैसला लिया. इस अनुच्छेद को वापस लिए जाने से पहले सरकार ने काफी सावधानी बरती और राज्य में भारी सुरक्षा बलों की तैनाती और पर्यटकों को राज्य से तुरंत बाहर निकलने को कहा. मोदी सरकार के इस फैसले से 370 को निरस्त करने से जिस हिंसा की आंशका व्यक्त की जा रही थी वो निराधार साबित हुई. माना गया कि सरकार ने 370 को रद्द करने से पहले जो ऐहतियातन कदम उठाए वो काफी कारगर साबित हुआ.

    मजबूत नेता की छवि– लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मिली बड़ी कामयाबी से मोदी की मजबूत नेता के तौर पर उभरे. माना गया कि तमाम चुनौतियों के बावजूद पीएम मोदी ने एकजुट दिखने वाले विपक्ष को पटखनी दे डाली. पीएम मोदी की छवि का ही कमाल कहा जा सकता है कि विधानसभा चुनावों भी बीजेपी ने जीत हासिल की.

    मुद्रा लोन की सफलता– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 दिसंबर को झारखंड के बोकारो में विकास की अपनी उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि पांच साल पहले स्वरोजगार के लिए बैंक से कर्ज लेना कितना मुश्किल था, 40-50 हजार रुपये का कर्ज लेने के लिए कितनी जगह हाजिरी लगानी पड़ती थी और अपना व्यापार शुरू करने में दिक्कत होती थी. हमने हालात को बदला है, बैंकों को मजबूत किया है और सामान्य जनता मुद्रा लोन के जरिये सैलून, ब्यूटी पार्लर खोले. लोगों ने टैक्सी और जीप खरीदी है और अपना कारोबार शुरू किया है.

    नोटबंदी, जीएसटी पर उठे थे सवाल – बिजनेस टुडे के संपादक रह चुके प्रोसेनजीत दत्ता अपने एक लेख में कहते हैं कि शुरुआत में मोदी सरकार सब सही करती दिख रही थी. वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भी सरकार को फायदा पहुंचा था, क्योंकि राजकोषीय मुनाफा बढ़ा जो उस समय की बड़ी जरूरत थी. इससे विदेशी निवेशक आकर्षित हुए, विनिर्माण प्रतिस्पर्धा की बात छिड़ी, राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण हुआ और उन कारोबारियों को आड़े हाथों लिया गया जो कर्ज नहीं चुका पाए थे.

    मोदी सरकार ने जब यह देखा कि जरूरत से ज्यादा क्षमता और पुराना कर्ज ढो रही प्राइवेट कंपनियां निवेश करने से कतरा रही हैं तो सरकार ने आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और रोजगार और मांग बनाने के लिए बुनियादी ढांचे पर खर्च करना शुरू कर दिया. यह उपाय काम आया और 2016 से अर्थव्यवस्था बेहतर होने लगी.

    मगर फिर 8 नवंबर, 2016 का दिन नोटबंदी का झटका लेकर आया. इस एक कदम ने 86 प्रतिशत मुद्रा निगलते हुए अर्थव्यवस्था को झटका दिया.  ग्रामीण क्षेत्रों और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ. इस स्थिति से उबरने के लिए सरकार ने एक और फैसला माल और सेवा कर (जीएसटी) का लिया. कहा गया कि इससे कारोबार क्षेत्र में उठा-पटक मच गई. जीएसटी की सबसे बड़ी खामी वन नेशन, वन टैक्स के सिद्धांत को बताया गया.

    मोदी ब्रैंड का जलवा

    इन हालातों को लेकर जब दिल्ली विश्वविद्यालय में पॉलिटिकल साइंस के अस्सिटेंट प्रोफेसर राजन झा से सवाल किया कि अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर इतनी अफसलताओं के बावजूद जनता के बीच मोदी ब्रैंड का जलवा कायम कैसे है? वह कहते हैं कि असल में अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर मिल रही नाकामी राष्ट्रवाद के मुद्दे के सामने धूमिल हो जा रही है. राजन झा याद दिलाते हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव में सबको लग रहा था कि कांग्रेस बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को चुनौती देगी. क्योंकि कांग्रेस ने तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में विधानसभा चुनाव जीतने में कामयाब रही थी. राजन झा कहते हैं

    कि लेकिन पुलवामा हमले के बाद समीकरण बदल गया. पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक ने लोकसभा चुनाव के नतीजे को बदल कर रख दिया, और परिणाम यह हुआ कि बीजेपी ने 2014 के मुकाबले 2019 में अधिक मत प्रतिशत के साथ जीत हासिल की. यहां तक कि आबादी के लिहाज से मजबूत होने के बावजूद दलित समुदाय की नाराजगी का असर लोकसभा चुनाव के नतीजे पर नहीं दिखा.

    वह कहते हैं कि महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले भी मोदी सरकार ने कड़ा फैसला लिया और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया और इन चुनावों में बीजेपी बड़ी पार्टी बनकर उभरी. कुल मिलाकर कह सकते हैं कि जब तक विपक्षी दल मोदी सरकार के किसी एक फैसले पर सवाल खड़ा करता तब तक वह दूसरा कोई कदम उठा चुके होते हैं, और जारी यही सिलसिला उनकी लोकप्रियता की एक बड़ी वजह भी है.

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